यह सारांश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा WP-13195-2023 (आदित्य मिश्रा और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य) के मामले में 6 जनवरी, 2026 को दिए गए आदेश पर आधारित है:

मुख्य विवाद

यह याचिका सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी 12 दिसंबर, 2019 के उस परिपत्र (Circular) के विरुद्ध थी, जिसमें प्रावधान था कि परिवीक्षा अवधि (Probation period) के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष के दौरान कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का क्रमशः 70%, 80% और 90% ही भुगतान किया जाएगा । इसी परिपत्र के आधार पर याचिकाकर्ताओं के वेतन से वसूली (Recovery) शुरू कर दी गई थी ।

न्यायालय का निर्णय

माननीय न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति दीपक खोत की खंडपीठ ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय दिए:+3

  • भेदभावपूर्ण नियम: न्यायालय ने पाया कि MPPSC के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों और अन्य एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर इस तरह का भेदभाव करना तर्कहीन और असंवैधानिक है ।
  • समान कार्य, समान वेतन: अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी उचित प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त हुआ है, तो वह ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत के आधार पर पूर्ण न्यूनतम वेतन पाने का हकदार है ।
  • पूर्व निर्णयों का संदर्भ: कोर्ट ने दिलीराज भिलाला (W.A. No. 1498/2024) और विनीता तिवारी (W.A. No. 2977/2025) के मामलों का हवाला दिया, जिसमें इस परिपत्र को पहले ही अनुचित ठहराया जा चुका था ।

अंतिम आदेश

  1. अदालत ने विवादित परिपत्र और उसके आधार पर जारी वसूली के आदेशों को रद्द (Quash) कर दिया है
  2. याचिकाकर्ताओं से अब तक वसूली गई राशि को वापस करने का निर्देश दिया गया है ।
  3. जिन याचिकाकर्ताओं को परिवीक्षा अवधि के दौरान 100% वेतन नहीं मिला था, उन्हें भी उस अवधि का पूरा 100% वेतन भुगतान करने का आदेश दिया गया है ।

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