कुम्हारों और SC/ST वर्गों हेतु पारंपरिक ईंट एवं बर्तन निर्माण के लिए मिट्टी व रेत उत्खनन संबंधी निर्देश
Guidelines Regarding Soil and Sand Excavation for Brick and Pottery Making by Hereditary Potters

यह दस्तावेज़ मध्य प्रदेश शासन के खनिज साधन विभाग द्वारा जारी किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अनुवांशिक कुम्हारों, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्यों को मिट्टी और रेत के उत्खनन में राहत देना है ।
इस दस्तावेज़ का विस्तृत सारांश निम्नलिखित है:
मुख्य निर्णय और निर्देश
- रॉयल्टी से छूट: अनुवांशिक कुम्हारों, SC/ST के सदस्यों या उनकी सहकारी समितियों को मिट्टी और रेत के उत्खनन पर कोई रॉयल्टी नहीं देनी होगी, बशर्ते वे इसका उपयोग पारंपरिक तरीके से ईंट, कवेलू या बर्तन बनाने के लिए करें ।
- ईंटों की संख्या की सीमा नहीं: नवीनतम निर्देशों के अनुसार, यदि ईंटों की संख्या 10 लाख या उससे अधिक भी होती है, तब भी मिट्टी और रेत पर रॉयल्टी देना अनिवार्य नहीं है ।
- पट्टे की आवश्यकता नहीं: इन वर्गों को मिट्टी या रेत निकालने के लिए किसी भी प्रकार के ‘खनिपट्टा’ (Mining Lease) प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है ।
उत्खनन हेतु नियम और शर्तें
- पारंपरिक साधन: यह छूट केवल तभी लागू होगी जब निर्माण का कार्य पारंपरिक साधनों से किया जाए, न कि यांत्रिक साधनों (machines) द्वारा ।
- स्थान का निर्धारण: उत्खनन उसी क्षेत्र से किया जाएगा जिसे संबंधित ग्राम सभा द्वारा निर्धारित किया गया हो ।
- प्रतिबंधित क्षेत्र: सुरक्षा की दृष्टि से कुछ स्थानों से निश्चित दूरी के भीतर उत्खनन प्रतिबंधित है:
- पुल, राजमार्ग, रेल लाइन, सार्वजनिक भवन, श्मशान, नदी किनारे और जलाशय से 100 मीटर ।
- पक्की सड़क या नालों से 50 मीटर ।
- ग्रामीण कच्चे रास्तों से 10 मीटर ।
आवेदन और प्रक्रिया (संलग्न प्रपत्र)
दस्तावेज़ में इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए विभिन्न प्रपत्र (Forms) भी दिए गए हैं:
- प्रपत्र-एक: प्रमाणीकरण प्राप्त करने के लिए तहसीलदार को दिया जाने वाला आवेदन पत्र ।
- प्रपत्र-दो: पटवारी द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली जाँच रिपोर्ट ।
- प्रपत्र-तीन: तहसीलदार द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणीकरण पत्र ।
- प्रपत्र-चार: खनिज के परिवहन के लिए ‘अभिवहन पारपत्र’ (Transit Pass) प्राप्त करने हेतु आवेदन ।
प्रशासनिक निर्देश
- कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे ग्राम सभाओं के माध्यम से उत्खनन हेतु क्षेत्र चिन्हित कराएं और उन्हें राजस्व रिकॉर्ड (खसरा कॉलम 12) में दर्ज करें ।
- इन नियमों की जानकारी जिले के सभी जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ।
