यह ज्ञापन मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग द्वारा 26 जुलाई 2019 को जारी किया गया है । इसका मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2018 के बाद सर्वेक्षण संख्यांकों (खसरा नंबर) को पुनर्कमांकित या उपविभाजित (बंटाकन/नक्शा तरमीम) करने की शक्तियों के संबंध में स्पष्टीकरण देना है ।

इस ज्ञापन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. विधिक स्थिति और भ्रम का समाधान

  • संशोधन अधिनियम 2018 से पहले, सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्कमांकित या उपविभाजित करने की शक्ति बंदोबस्त अधिकारी के पास थी ।
  • संशोधन के बाद ‘बंदोबस्त अधिकारी’ का पद समाप्त हो गया है, जिससे राजस्व अधिकारियों के बीच कार्य अधिकारिता को लेकर प्रश्न उठा था 。

2. वर्तमान शक्तियों का आवंटन

  • संशोधित संहिता की धारा 68 के अनुसार, अब सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लॉक संख्यांक और भू-खण्ड संख्यांक को पुनर्कमांकित, उपविभाजित या समामेलित (मिलाने) करने की शक्ति जिला सर्वेक्षण अधिकारी को दी गई है ।
  • धारा 76 के प्रावधानों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में भू-सर्वेक्षण का कार्य नहीं चल रहा है, वहां जिला सर्वेक्षण अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग कलेक्टर द्वारा किया जाएगा ।

3. तहसीलदार की अधिकारिता

  • मध्यप्रदेश जनरल क्लाजेज एक्ट, 1957 की धारा 25 का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि पुराने कानून के तहत जारी अधिसूचनाएं तब तक प्रभावी रहती हैं जब तक उन्हें बदला न जाए ।+1
  • चूंकि 27 जून 1968 की अधिसूचना के माध्यम से कलेक्टर ने ये शक्तियां तहसीलदार को सौंपी थीं, इसलिए वर्तमान में भी उन क्षेत्रों में जो भू-सर्वेक्षण के अधीन नहीं हैं, नक्शा तरमीम और पुनर्कमांकन का कार्य तहसीलदार द्वारा ही किया जाना अपेक्षित है ।+2

4. निष्कर्ष

  • जब तक कोई नई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 1968 की अधिसूचना प्रभावी रहेगी ।
  • अतः, तहसीलदार के पास सर्वेक्षण संख्यांकों को उपविभाजित या पुनर्कमांकित करने का कानूनी अधिकार बना हुआ है ।

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