फौती नामांतरण एवं बंटवारा प्रकरणों के त्वरित निराकरण हेतु मार्गदर्शी सिद्धांत
Guidelines for the Expedited Resolution of Mutation and Partition Cases

यह दस्तावेज़ मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग द्वारा 6 अक्टूबर 2021 को जारी किया गया एक दिशा-निर्देश है, जिसका मुख्य उद्देश्य फौती नामांतरण और बंटवारा प्रकरणों का त्वरित निराकरण करना है ।

इस सारांश को मुख्य बिंदुओं में नीचे समझा जा सकता है:

प्रकरणों में देरी का कारण और समाधान

  • तहसील न्यायालयों में वारिसों या सहखातेदारों की अनुपस्थिति के कारण इन प्रकरणों में होने वाले विलंब को शासन ने अनुचित माना है ।
  • यदि हितबद्ध पक्षकारों को विधिवत सूचना मिल गई है, तो उनकी व्यक्तिगत अनुपस्थिति के आधार पर प्रकरण को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए

प्रमुख मार्गदर्शी सिद्धांत

1. फौती नामांतरण (Inheritance Mutation)

  • अविवादित नामांतरण की स्थिति में भू-राजस्व संहिता की धारा 110 के तहत 30 दिनों के भीतर आदेश पारित करने का प्रावधान है ।
  • यदि सूचना प्रकाशन और नोटिस जारी होने के बाद कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो निर्धारित समय सीमा में आदेश दिया जाना चाहिए ।

2. भूमि विक्रय के आधार पर नामांतरण

  • अक्सर विक्रेता (Seller) भूमि बेचने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया में रुचि नहीं लेते और उपस्थित नहीं होते ।
  • ऐसी स्थिति में, यदि सार्वजनिक उद्घोषणा और नोटिस के बाद भी विक्रेता उपस्थित नहीं होता या आपत्ति दर्ज नहीं करता, तो इसे उसकी मौन स्वीकृति (Tacit Consent) मानते हुए गुण-दोष के आधार पर आदेश दिया जा सकता है ।

3. खाते का विभाजन/बंटवारा (Partition)

  • धारा 178 और 178-क के तहत, यदि सूचना तामिली के बाद भी पक्षकार अनुपस्थित रहते हैं, तो बार-बार नोटिस जारी करने के बजाय उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर प्रकरण का निराकरण किया जाना चाहिए ।
  • पंजीकृत विभाजन विलेख (Registered Partition Deed): यदि आवेदन पंजीकृत विलेख के आधार पर है, तो उसकी वैधता सुनिश्चित कर सीधे कार्यान्वित किया जाना चाहिए ।
  • स्व-अर्जित संपत्ति: यदि भूमिस्वामी की संपत्ति स्व-अर्जित है और वह प्रस्तावित विभाजन (फर्द बंटवारा) प्रस्तुत करता है और कोई आपत्ति नहीं आती है, तो उसी के अनुसार विभाजन किया जाना चाहिए ।

प्रशासनिक निर्देश

  • कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि वे अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को इन सिद्धांतों का पालन करने हेतु निर्देश दें ।
  • मासिक बैठकों में इन प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart